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उज्ज्वलनीलमणिः (Ujjvala Nilamani - Hindi)

श्रीलरूपगोस्वामिना प्रणीतः

Sri Ujjvala-nilamani deals with every aspect of madhura-rasa and is the only definitive guide to madhura-rasa and ragamayi-bhakti.

श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज

  • Author: Srila Rupa Goswami
  • Translated and Edited by Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: 2006, Gaudiya Vedanta Prakashan
  • Binding: Hardcover
  • Pages: 998, Includes Color Plates, Index and Dictionary
  • FREE SHIPPING WITHIN INDIA

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श्रीलरूपगोस्वामिना प्रणीतः

उज्ज्वलनीलमणिः

श्रीलजीवगोस्वामिकृतया लोचनरोचनीनाम्न्या
तथा
श्रील विश्वनाथचक्रवर्तिकृतया आनन्दचन्द्रिकानाम्न्या
टीकया च सहितः


श्रीगौड़ीय-वेदान्त-समितेः प्रतिष्ठापकवराणां
नित्यलीलाप्रविष्ट-ॐ-विष्णुपाद-परमहंस-स्वामिनां
श्रीमद्भक्तिप्रज्ञान-केशव-गोस्वामि-महाराजानां

पादत्राणावलम्बकेन परिव्राजकाचार्येण
(त्रिदण्डिस्वामिना)
श्रीमद्भक्तिवेदान्त-नारायण-गोस्वामि-महाराजेन
अनूदितः सम्पादितश्च

प्रस्तुत उज्ज्वलनीलमणि-श्रीलरूप गोस्वामी विरचित अखिल-रसामृतमूर्त्ति श्रीकृष्णके उन्नात-उज्ज्वल या मधुररस-विज्ञानका शास्त्र है। वास्तवमें यह ग्रन्थ भक्तिरसामृतसिन्धुका ही उत्तर-अंश है। गोपीभजनके विषयमें विशद् रूपमें परिपूर्ण है। प्रेमरसमय श्रीगोविन्दका भजन करनेके लिए व्रजरमणियोंका आनुगत्य अत्यन्त आवश्यक एवं आदरणीय है। उनके आनुगत्यमें आदर-सौहार्द और माधुर्य इत्यादि लेकर जाना होता है। गोपियोंका प्रेमानुराग या प्रेममाधुरी इस जगतमें सुदुर्लभ होनेपर भी, उनकी प्रीतिका विषय भाषामें प्रस्फुटित न होनेपर भी पूज्यपाद श्रीरूप गोस्वामी पादने उसी उन्नात-उज्ज्वल व्रजरसकी छायाको प्रकाश किया है-हमलोग उसका बिन्दुमात्र आस्वादन करनेसे ही चरितार्थ हो सकते हैं। करुणावरुणालय श्रीगौरसुन्दरने हम लोगों जैसे नारकीय जीवोंके लिए श्रीरूप पादकी लेखनीके अग्रभागमें यह अतुलनीय अमूल्य सुधाभण्डार

निहित किया है। हम उस पीयूष-समुद्रके कणमात्रका भी आस्वादन करनेपर त्रितापज्वालासे अवश्य ही छुटकारा पा सकते हैं। श्रीकृष्णप्राप्तिके लिए गोपियोंके हृदयमें भीषण वेग, प्रबल आकर्षण इस ग्रन्थके पत्र-पत्रम सुस्पष्ट भावसे अप्रित है। श्रीकृष्णदर्शनकी लालसाने उनके हृदयमें अनुराग-स्त्रोतको किस प्रकारसे सशक्त उत्ताल तरङ्गोंमें उच्छ्वलित किया है, इस ग्रन्थमें उसकी समुज्ज्वल प्रतिच्छवि विशद् भावसे चित्रित हुई है। उन्नातोज्ज्वल रसगर्भ, प्रेमभक्तिका ऐसा समुज्ज्वल, सुमधुर उपदेश जगतके और किसी ग्रन्थमें देखा या सुना नहीं जाता। वस्तुतः श्रील रूप गोस्वामिपाद द्वारा रचित दोनों ग्रन्थों (उज्ज्वलनीलमणि तथा भक्तिरसामृतसिन्धु) को गौड़ीय वैष्णव रसशास्त्रका वेद कहनेमें भी अत्युक्ति नहीं होगी।

उज्ज्वलनीलमणि ग्रन्थकी दो प्रसिद्ध टीकाएँ हैं-(१) श्रीजीव गोस्वामी कृत लोचनरोचनी टीका और (२) श्रीविश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर कृत आनन्दचन्द्रिका टीका। इनके साथ प्रत्येक श्लोकके नीचे मैंने तात्पर्यानुवाद देनेका प्रयास किया है।

विषय -सूची : प्रस्तावना, अथ नायकभेद-प्रकरणम्, अथ नायकसहायभेद-प्रकरणम, अथ श्रीहरिप्रिया-प्रकरणम्, अथ राधा-प्रकरणम्, अथ नायिकामेदाः, अथ श्रीयूथेश्वरीभेद-प्रकरणम्, अथ दूतीभेद-प्रकरणम्, अथ सखी-प्रकरणम्, अथ श्रीहरिवल्लभा-प्रकरणम, अथोद्दीपन-प्रकरणम, अथानुभाव-प्रकरणम, अथ सात्त्विक-प्रकरणम, अथ व्यभिचारि-प्रकरणम,
अथ स्थायिभाव-प्रकरणम्, अथ शृङ्गारभेद-प्रकरणम, मूल-श्लोकसूची, शब्द-कोश ।

Bhakti-rasamrta-sindhu is a book written by rasikacarya Srila Rupa Gosvami in an elaborate way about the science of devotional service, and by reading this book one can understand the meaning of devotional service. But to elaborately explain madhura-rasa, which is not dealt in great depth in Bhakti-rasamrta-sindhu, he wrote Sri Ujjvala-nilamani. It deals with every aspect of madhura-rasa. This book is the only definitive guide to madhura-rasa and ragamayi-bhakti.

Caution: This book will not be comprehensible unless one dives into the deep ocean of bhakti, i.e. Bhakti-rasamrta-sindhu. Only after attaining proficiency in Bhakti-rasamrta-sindhu should one dare to search for this blue emerald, Ujjvala-nilmani, found deep within the ocean of bhakti, otherwise one may get lost. We should very carefully understand the exalted position of this book and also appreciate the qualification that are required for hearing it.

TITLE: Ujjvala Nilamani - Hindi
AUTHOR: Srila Rupa Goswami
Translated and Edited by Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
PUBLISHER: Gaudiya Vedanta Prakashan
EDITION: 2006, First Edition.
BINDING: Hardcover
PAGES and SIZE: 998,  9" X 6", with Color Plates, Index and Dictionary
SHIPPING WEIGHT: 1350 grams
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Sri Ujjvala-nilamani deals with every aspect of madhura-rasa and is the only definitive guide to madhura-rasa and ragamayi-bhakti.

श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज

  • Author: Srila Rupa Goswami
  • Translated and Edited by Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: 2006, Gaudiya Vedanta Prakashan
  • Binding: Hardcover
  • Pages: 998, Includes Color Plates, Index and Dictionary
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