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शिवतत्त्व (Siva Tattva - Hindi)

त्रिदण्डिस्वामी श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराजजी के श्रीमुखनिःसृत अमृतमय वाणीसे सङ्कलित
Lectures by Srila Bhaktivedanta Narayana Goswami Maharaja
  • Author: Srila Bhaktivedanta Narayana Goswami Maharaja
  • Publisher: 2009, Gaudiya Vedanta Publications
  • Binding: SoftBound
  • Pages: 60

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॥ श्रीश्रीगुरु-गौराङ्गौ-जयतः ॥

शिवतत्त्व

श्रीगौड़ीय वेदान्त समिति एवं तदन्तर्गत भारतव्यापी श्रीगौड़ीय
मठोंके प्रतिष्ठाता, श्रीकृष्णचैतन्याम्नाय दशमाधस्तनवर श्रीगौड़ीयाचार्य
नित्यलीलाप्रविष्ट
ॐ विष्णुपाद अष्टोत्तरशतश्री
श्रीमद्भक्तिप्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराजजीके
अनुगृहीत

त्रिदण्डिस्वामी
श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी
महाराजजी
के श्रीमुखनिःसृत अमृतमय वाणीसे सङ्कलित

शिवजी भगवान् श्रीकृष्णकी स्वेच्छासे प्रकट हुए। मनुष्य जीवनके परम लक्ष्य और भगवान्से सम्बन्ध जाननेके लिये शिवतत्त्वका ज्ञान अति आवश्यक है। शिवजीके अनेक नाम और रूप हैं, जैसे शङ्कर, शम्भु, महेश आदि। अपने मूल रूपमें वे गोपीश्वर महादेव हैं और इस रूपमें वे भक्तिराज्यके द्वारपाल हैं। वे भगवान्की निःस्वार्थ सेवाके रूपमें भक्ति मार्गपर चल रहे साधकोंपर कृपा करके उनका मार्ग सरल और सुरक्षित बना देते हैं। परमाराध्यतम गुरुदेव श्रील भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराजने गुरु-परम्परासे प्राप्त ज्ञानके द्वारा ब्रह्मा, विष्णु और महेशकी स्थितिका स्पष्ट वर्णन किया है और शिवतत्त्वके रहस्यका उद्घाटन करके शिवजीकी कृपा और सहनशीलताके गुणोंको उजागर किया है।

इसके प्रमाणके रूपमें शास्त्रोंसे अनेक उदाहरण दिये गये हैं, जो उनके भीतर विरोधी गुणोंके समावेशके रहस्यको प्रकाशित करते हैं। वे जगत्की प्रलय करनेवाले होनेपर भी जगत्की सृष्टिके उपादान हैं; तमोगुणके अधिष्ठाता होनेपर भी वे दिव्य ज्ञानके भण्डार हैं; वे छल करनेमें चतुर हैं और साथ ही परम कृपालु भी हैं। भूत-प्रेत-पिशाच आदि उनके परिकर होनेपर भी बड़े-बड़े देवता और भक्त उनके सङ्गकी अभिलाषा करते हैं, यहाँ तक कि वे स्वयं भगवान् श्रीकृष्णका सङ्ग भी प्राप्त करते हैं। इन सब विषयोंका इस ग्रन्थमें विशद विवरण दिया गया है, जिसे पढ़कर पाठक शिवजीके वास्तविक स्वरूपको समझकर अपने जीवनको सफल कर सकेंगे।

विषय सूची - प्रस्तावना, शिवतत्त्वके तीन विचार (तत्त्वगत विचार, ऐश्वर्यगत विचार, नरवत् विचार), असुरोंको वरदान ( राजा जयद्रथको वरदान, शाल्वको वरदान, रावणको वरदान, मय दानव, वृकासुरको वरदान, बाणासुरकी रक्षा, काशी दहन), कामदेवपर विजय (सतीजीका शिवजीके कथनपर सन्देह, कामदेवका भस्म होना), पूर्ण प्रेमका दान (सनातन गोस्वामीसे मित्रता, ब्राह्मणको भगवत्-प्रेमदान), पद और व्यक्तित्व (शिवजीका स्वरूप, शिवजी ब्रह्मासे श्रेष्ठ शिवजी और प्रह्लाद), उपसंहार ।

In this book Siva Tattva, Srila Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja brilliantly clarifies the holy Hindu trinity: Brahma, Visnu and Siva. Empowered by his spiritual masters in the disciplic succession of the Gaudiya Vaisnava tradition, he reveals the conclusive truth (tattva) of Lord Siva's original position and gives us a look into his endearing and affectionate nature.

Shiva-tattva clarifies the truth (tattva) of Lord Siva, particularly in relation to Lord Visnu. Sri Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja’s strong philosophical presentation is supported and enhanced by his rendition of numerous pastimes of Lord Śiva. This gives us a glimpse of Lord Siva’s pure devotion to the Supreme Lord and of his endearing and affectionate nature.

TITLE: Shiva Tattva - Hindi
AUTHOR: Srila Bhaktivedanta Narayan Goswami Maharaj
PUBLISHER: Gaudiya Vedanta Publications
EDITION: First, 2009
PAGES: 60
SHIPPING WEIGHT: 200 grams

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शिवतत्त्व (Siva Tattva - Hindi)

शिवतत्त्व (Siva Tattva - Hindi)

त्रिदण्डिस्वामी श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराजजी के श्रीमुखनिःसृत अमृतमय वाणीसे सङ्कलित
Lectures by Srila Bhaktivedanta Narayana Goswami Maharaja
  • Author: Srila Bhaktivedanta Narayana Goswami Maharaja
  • Publisher: 2009, Gaudiya Vedanta Publications
  • Binding: SoftBound
  • Pages: 60

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