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अर्चन दीपिका (Arcana Dipika - Hindi)

श्रीमद्भक्तिवेदान्त वामन गोस्वामी महाराज
श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
  • Authors: Sri Srimad Bhaktivedanta Vamana Gosvami Maharaja, Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja 
  • Publisher: 2003, Gaudiya Vedanta Prakashan 
  • Binding: Softcover 
  • Pages: 62

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श्रीश्रीगुरु-गौराङ्गो जयतः

अर्चन-दीपिका

श्रीकृष्णचैतन्यदशमाधस्तनान्वयवर श्रीगौड़ीयाचार्य-केशरी
श्रीगौड़ीय वेदान्त समितिके प्रतिष्ठाता
सभापति-आचार्य
ॐ विष्णुपाद १०८ श्रीश्रील भक्तिप्रज्ञान केशव गोस्वामी
महाराजजीके अनुगृहीत

परिव्राजकाचार्य त्रिदण्डिस्वामी
श्रीमद्भक्तिवेदान्त वामन गोस्वामी महाराज
(श्रीगौड़ीय वेदान्त समितिके वर्तमान
आचार्य एवं सभापति)
द्वारा सम्पादित
एवं

परिव्राजकाचार्य त्रिदण्डिस्वामी
श्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
द्वारा संग्रहीत और सङ्कलित

भगवानके अर्चन द्वारा शीघ्र ही चित्तकी प्रसन्नता प्राप्त होती है एवं यही सब प्रकारके अभीष्ट अथवा मङ्गल-कामनाओंका कारण है। अर्चनको छोड़कर विषयाकृष्ट व्यक्तिके लिए असत्सङ्ग-त्यागादि कार्य संभव नहीं है। सात्त्वत (भगवत् सम्बन्धी) विधिद्वारा भगवदर्चनका उपदेश स्वयं श्रीभगवानने दिया है एवं ब्रह्मा-शिव-नारद-व्यास आदि ऋषियोंने इसे सारे वर्णाश्रमी एवं स्त्री-शूद्रादिके लिए भी परम-आत्मकल्याणकारी बतलाया है। अर्चन तीन प्रकारका है-वैदिक, तान्त्रिक एवं मिश्र। प्रतिमा-स्थण्डिल (यज्ञ-वेदी), आग, सूर्य, जल एवं हृदय-ये सभी अर्चनके आधार हैं। शिलामयी, काष्ठमयी, बालुकामयी, मनोमयी एवं मणिमयी आदि भेदसे प्रतिमाएँ आठ प्रकारकी होती हैं। उनमें भी चल एवं अचल भेदसे दो प्रकारकी हैं। मन्त्रादिके द्वारा स्नान, सन्ध्योपासना, अर्चाका परिमार्जन, वस्त्र एवं अलप्रार-प्रदान, अर्चनके पात्रों एवं द्रव्यसमूहका प्रोक्षण (छिड़काव आदि), पाद्य, अर्घ्य-आचमनीय, गन्ध-धूप दीप-पुष्प-नैवेद्यादिका अर्पण, पार्षदशक्ति गुरुवर्गकी पूजा, मूलमन्त्रका जप, स्तोत्रादि पाठ, दण्डवत्-प्रणाम, प्रार्थना, निर्माल्य-धारण-ये सभी अर्चनके अङ्ग हैं। श्रीमन्दिर निर्माणपूर्वक श्रीविग्रहप्रतिष्ठा एवं यात्रामहोत्सवादि भी इसके अन्तर्गत हैं। इस प्रकारसे निरपेक्ष भक्तियोग द्वारा श्रीहरिका अर्चन करनेपर उनके चरणकमलोंमें भक्ति प्राप्त होती है।

The title of this book, Arcana-dipika, means "the lamp that illuminates arcana". The term arcana signifies honour or worship. As one of the nine processes of devotional service, it refers to worshipping the deity form of the Supreme Lord. Arcana-dipika teaches us how this service is performed and how to please the Supreme Lord through this process of worship. By the mercy of Sri Caitanya Mahaprabhu; the Six Gosvamis and other contemporary followers of Sriman Mahaprabhu; and more recently Srila A.C. Bhaktivedanta Svami Maharaja the process of deity worship, which is the authentic method of approaching Sri Bhagavan, has been successfully introduced to the entire world.

TITLE: Archana Dipika - Hindi
AUTHORS: Sri Srimad Bhaktivedanta Vamana Gosvami Maharaja, Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
PUBLISHER: Gaudiya Vedanta Prakashan
EDITION: Third, 2003
BINDING: Paperback
PAGES and SIZE: 88, 7" X 5"
SHIPPING WEIGHT: 200 grams
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अर्चन दीपिका  (Arcana Dipika - Hindi)

अर्चन दीपिका (Arcana Dipika - Hindi)

श्रीमद्भक्तिवेदान्त वामन गोस्वामी महाराज
श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
  • Authors: Sri Srimad Bhaktivedanta Vamana Gosvami Maharaja, Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja 
  • Publisher: 2003, Gaudiya Vedanta Prakashan 
  • Binding: Softcover 
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