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श्रीश्रीचमत्कारचन्द्रिका ( Sri Camatkara-candrika - Hindi)

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श्रीश्रीचमत्कारचन्द्रिका  ( Sri Camatkara-candrika - Hindi)

श्रीश्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर विरचित 

श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज

  • Author: Srila Vishvanatha Chakravarti Thakura
  • Hindi Translated and Commentary by Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: 2008, Gaudiya Vedanta Publications
  • Binding: SoftBound
  • Pages: 78
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श्रीश्रीचमत्कारचन्द्रिका 

Sri Chamatkara-chandrika - Hindi

श्रीश्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर विरचित

श्रीगौड़ीय वेदान्त समिति एवं तदन्तर्गत भारतव्यापी श्रीगौड़ीय मठोंके प्रतिष्ठाता, 
श्रीकृष्णचैतन्याम्नाय दशमाधस्तनवर श्रीगौड़ीयाचार्य केशरी
नित्यलीलाप्रविष्ट ॐ विष्णुपाद अष्टोत्तरशतश्री श्रीमद्भक्तिप्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराजके
अनुगृहीत

श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज

द्वारा सम्पादित

श्रीश्रीचमत्कारचन्द्रिका श्रीश्रीराधागोविन्दकी लीलाके अनुपम तथा प्रवीण चित्रकारने अपने परम मधुर स्वभाववशतः प्रेमभक्तिकी सुकोमल तूलिका (चित्रकारकी कूची) में महामोहन अमृतरसको मिलाकर इस ग्रन्थमें श्रीश्रीराधाकृष्ण युगलके चार मनोज्ञ, अद्भुत तथा सुचारु मिलन कौतूहल चित्रोंको अङ्कितकर व्रजरसके लोलुप रसिक एवं भावुक पाठकों तथा साधकोंके समक्ष प्रस्तुत किया है। ये चारों कौतूहल चित्र रस-परिवेशन, शब्द-विन्यास-चातुर्य और भाव माधुर्यसे रसिकों और भावुकोंके चित्तको चमत्कृतकर उन्हें मुग्ध करनेवाले हैं। इसके अलावा ये चारों कौतूहल हास्यरससे भी परिपूर्ण हैं, जो पाठकों और साधकोंके चित्तको हास्य रसके आनन्दरूपी सागरमें निमग्न कर देते हैं। अलङ्कारिकोंका कहना है - "रसे सारः चमत्कारः" रसका सार चमत्कार है अर्थात् यह चमत्कारचन्द्रिका रसोंका सार है। अतएव इस ग्रन्थके चारों कौतूहलोंमें रसोंका सार प्रदर्शित होनेके कारण इस ग्रन्थका नाम ‘श्रीश्रीचमत्कारचन्द्रिका’ सार्थक है।

This incomparable narrative poem has been painted with the soft brush of Srila Visvanatha Cakravarti Thakura's supremely sweet and natural prema-bhakti and the color of the all enchanting nectar of rasa. This literary composition consists of four astonishing and delightfully charming stories of the mischievous meetings of the Divine Couple, Sri Sri Radha-Krsna. It is presented for rasika and bhavuka readers, as well as sadhakas who desire to taste vraja-rasa.

TITLE: SriSri Camatkara-candrika

AUTHOR: Srila Vishvanatha Chakravarti Thakura

Editor: Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja

PUBLISHER: Gaudiya Vedanta Publications.

EDITION: Second, 2008.

BINDING: SoftCover

Pages and Size : 78,  8" X 5.5"

SHIPPING WEIGHT: 300 grams.

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श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज

  • Author: Srila Vishvanatha Chakravarti Thakura
  • Hindi Translated and Commentary by Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: 2008, Gaudiya Vedanta Publications
  • Binding: SoftBound
  • Pages: 78
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