श्रीभागवतार्कमरीचिमाला  ( Sri Bhagavatarka-marici-mala  - Hindi) View larger

श्री भागवतार्क मरीचिमाला ( Sri Bhagavatarka Marici Mala - Hindi)

A Garland of Rays from the Sunlike Srimad Bhagavatam.
  • Author: Srila Bhaktivinoda Thakura 
  • Hindi Translation and Commentry by Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: 2008, Gaudiya Vedanta Prakashan
  • Binding: Hardbound
  • Pages: 416, Illustrated
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कलियुग पावनावतारी भगवान् श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु द्वारा
प्रदर्शित सम्बन्ध-अभिधेय-प्रयोजनात्मक निर्देशिका

श्रीभागवतार्कमरीचिमाला

सच्चिदानन्द श्रील भक्तिविनोद ठाकुर द्वारा
संगृहीत तथा उन्हींके द्वारा रचित ‘मरीचिप्रभा’ नामक
गौड़ीय भाष्यसे सुसज्जित

श्रीगौड़ीय वेदान्त समिति एवं तदन्तर्गत भारतव्यापी श्रीगौड़ीय मठोंके
प्रतिष्ठाता, श्रीकृष्णचैतन्याम्नाय दशमाधस्तनवर
श्रीगौड़ीयाचार्यकेशरी नित्यलीलाप्रविष्ट
ॐ विष्णुपाद अष्टोत्तरशतश्री
श्रीमद्भक्तिप्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराजजीके
अनुगृहीत

त्रिदण्डिस्वामी
श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
द्वारा अनुवादित एवं सम्पादित 

यह श्रीभागवतार्कमरीचिमाला कलियुग पावनावतारी श्रीकृष्णचैतन्य महाप्रभु द्वारा प्रदर्शित सम्बन्ध, अभिधेय और प्रयोजनको निर्दिष्ट करती है। सम्बन्ध, अभिधेय और प्रयोजनके अनुसार श्रीमद्भागवतके इन श्लोकोंका संकलन और अनुवाद, श्रीचैतन्य महाप्रभुके कृपापात्र परिकरोंके अतिरिक्त और कोई भी नहीं कर सकता। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर श्रीचैतन्य महाप्रभुके अन्तरङ्ग पार्षद हैं और इसीलिए उन्होंने इन श्लोकोंका इस प्रकार सुन्दर और
आश्चर्य रूपमें गुम्फन किया है तथा इसकी व्याख्या करनेमें भी समर्थ हुए हैं।  

विषय -सूची: भूमिका, सम्बन्धज्ञान प्रकरण : प्रमाण-निर्देश, सूचना, भागवतार्कोदय - श्रीमद्भागवतरूपी सूर्यका उदय, भागवत-विवृति - श्रीमद्भागवतका विवरण, भगवत्स्वरूपतत्त्वम् - भगवत्-स्वरूपके तत्त्वका निरूपण,
भगवत्-शक्ति तत्त्व, भगवत्-रस तत्त्व, जीवतत्त्व, बद्धजीवके लक्षण, सौभाग्यशाली जीवके लक्षण, शक्ति परिणामवाद पर आधारित - अचिन्त्य-भेदाभेदतत्त्वके लक्षण् ।

अभिधेय प्रकरण : अभिधेय-विचार, साधनभक्ति, ऐकान्तिकी नामाश्रया साधनभक्ति, भक्ति-प्रातिकूल्यविचार, भक्त्यानुकूल्य-विचार, भावके उदयका क्रम ।
प्रयोजन प्रकरण : प्रयोजनतत्त्वका विचार, सिद्धप्रेमरस -रसकी महिमाका वर्णन, सिद्धप्रेमरस - रसगरिमा, सिद्धप्रेमरस - रसमधुरिमा ।
ग्रन्थके गुम्फनका इतिहास,
उद्धृत श्लोकोंकी वर्णानुक्रम-सूची ।

"Shri Bhagavatarka-marichi-mala, meaning a garland made of rays from the sun-like Srimad-Bhagavatam", is an exquisite compilation by Srila Bhaktivinoda Thakura of the most important verses of the Srimad-Bhagavatam according to the fundamental principles (tattvas) of sambandaabhideya and prayojana together with their deep meanings."

TITLE: Sri Bhagavatarka Marichi Mala - Hindi
AUTHOR: Srila Bhaktivinoda Thakura 
Hindi Translation and Commentry by Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
PUBLISHER: Gaudiya Vedanta Prakashan
EDITION: First, 2008
BINDING: Hardbound
PAGES and SIZE: 416, 9" X 6", Illustrated
SHIPPING WEIGHT: 850 grams
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श्री भागवतार्क मरीचिमाला  ( Sri Bhagavatarka Marici Mala - Hindi)

श्री भागवतार्क मरीचिमाला ( Sri Bhagavatarka Marici Mala - Hindi)

A Garland of Rays from the Sunlike Srimad Bhagavatam.
  • Author: Srila Bhaktivinoda Thakura 
  • Hindi Translation and Commentry by Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: 2008, Gaudiya Vedanta Prakashan
  • Binding: Hardbound
  • Pages: 416, Illustrated
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