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उत्कलिकावल्लरिः (Utkalika Vallari - Hindi)

स्तवमालाके अन्तर्गत
सुतीव्र उत्कण्ठामयी लता।
A Vine of Intense Longings
श्रील रूप गोस्वामी विरचित
गौड़ीय वेदान्ताचार्य श्रील बलदेव विद्याभूषण प्रभु द्वारा रचित स्तवमाला-विभूषण भाष्य सहित
श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
  • Author: Sri Rupa Goswami
  • Sri Sri Baladeva Vidyabhushanpada’s Stava Mala Vibhushan Bhasya Commentary 
  • Hindi Translation and Commentary by Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: Gaudiya Vedanta Prakashan
  • Binding: SoftBound
  • Pages: 68
  • FREE SHIPPING WITHIN INDIA

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श्रीश्रीगुरु-गौराङ्गौ-जयतः
श्रील रूप गोस्वामी विरचित
स्तवमालाके अन्तर्गत

उत्कलिकावल्लरिः

गौड़ीय वेदान्ताचार्य श्रील बलदेव विद्याभूषण प्रभु द्वारा
रचित स्तवमाला-विभूषण भाष्य सहित

श्रीगौड़ीय वेदान्त समिति एवं तदन्तर्गत भारतव्यापी श्रीगौड़ीय मठोंक
प्रतिष्ठाता, श्रीकृष्णचैतन्याम्नाय दशमाधस्तनवर
श्रीगौड़ीयाचार्य के्यारी नित्यलीलाप्रविष्ट
ॐ विष्णुपाद अष्टोत्तर्यातश्री
श्रीमद्भक्तिप्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराजके
अनुगृहीत

त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
द्वारा सम्पादित

गौरपार्षद प्रवर श्रील रूप गोस्वामी प्रभुने गौर-कृपाभिषिक्त होकर अप्राकृत-रस-शास्त्रके आचार्यके रूपमें जिन समस्त अमूल्य कृतियों की रचना की है, श्रीस्तवमाला भी उन्हींमेसे श्रील रूप गोस्वामीजीकी एक अपूर्व कृति है। श्रीश्रीराधाकृष्ण-सेवा-प्रार्थनामय 'उत्कलिकावल्लरिः' श्रील रूप गोस्वामी द्वारा रचित एवं श्रील जीव गोस्वामी द्वारा संगृहीत इसी श्रीस्तवमालाका एक काव्य-पुष्प है। श्रील रूप गोस्वामिपादकी उन्नात-उज्ज्वल-माधुर्यमयी भक्तिरूपी-भ्रमरीके मधुर गुँजनका उच्चादर्श ही इस स्तोत्रमें परिस्फुटित हुआ है। 'उत्कलिका' का अर्थ है - 'सुतीव्र उत्कण्ठा' अथवा 'सुतीव्र व्याकुलता' तथा 'वल्लरी' का अर्थ है -'लता'। अतएव 'उत्कलिका-वल्लरी' का अर्थ हुआ-सुतीव्र उत्कण्ठामयी लता।

Srila Rupa Gosvami Prabhu, being Sri Gaurahari’s topmost associate, was saturated with His mercy. As the acarya of transcendental rasa-sastras, he wrote invaluable literatures, including the most exceptional Sri Stava-mala, "A Garland of Prayers," which was actually compiled later by Srila Jiva Gosvami. Utkalika-vallari, one of the flowers in this garland, is a poetic entreaty for the service of Sri Sri Radha-Krsna. Srila Rupa Gosvamipada’s sweet devotion to unnata-ujjvala-madhurya-mayi-bhakti – the brilliantly shining amorous mellow – is a honeybee whose delightful humming, here at its finest, has fully blossomed in this prayer. Utkalika means 'very intense eagerness mixed with extreme restlessness,' and vallari means 'creeper;' hence Utkalika-vallari means "The Vine of Intense Longings."

TITLE: उत्कलिकावल्लरिः (Utkalika Vallari - Hindi)
AUTHOR: Sri Rupa Goswami
Sri Sri Baladeva Vidyabhushanpada’s Stava Mala Vibhushan Bhasya Commentary
Hindi Translation and Commentary by Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
PUBLISHER: Gaudiya Vedanta Prakashan
EDITION: First, 2009
BINDING: SoftCover
PAGES and SIZE: 68,  8.5" X 5.5"
SHIPPING WEIGHT: 200 grams
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स्तवमालाके अन्तर्गत
सुतीव्र उत्कण्ठामयी लता।
A Vine of Intense Longings
श्रील रूप गोस्वामी विरचित
गौड़ीय वेदान्ताचार्य श्रील बलदेव विद्याभूषण प्रभु द्वारा रचित स्तवमाला-विभूषण भाष्य सहित
श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
  • Author: Sri Rupa Goswami
  • Sri Sri Baladeva Vidyabhushanpada’s Stava Mala Vibhushan Bhasya Commentary 
  • Hindi Translation and Commentary by Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: Gaudiya Vedanta Prakashan
  • Binding: SoftBound
  • Pages: 68
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