उज्ज्वलनीलमणि-किरण  (Ujjavala-Nilamani-Kirana - Hindi) View larger

उज्ज्वलनीलमणि-किरण (Ujjavala Nilamani Kirana - Hindi)

श्रीश्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर विरचित उज्ज्वलनीलमणि-किरण

Srila Visvanatha Cakravarti Thakura's essence of Srīla Rupa Gosvami's Ujjvala-Nilamani

श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
  • Author: Srila Vishvanatha Chakravarti Thakura
  • Hindi Translated and Commentary by Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: 2006, Gaudiya Vedanta Prakashan
  • Binding: SoftBound
  • Pages: 44
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उज्ज्वलनीलमणि-किरण

श्रीश्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर विरचित उज्ज्वलनीलमणि-किरण

 श्रीगौड़ीय वेदान्त समिति एवं तदन्तर्गत भारतव्यापी श्रीगौड़ीय मठोंके प्रतिष्ठाता

श्रीकृष्णचैतन्याम्नाय दशमाधस्तनवर श्रीगौड़ीयाचार्य केशरी
नित्यलीलाप्रविष्ट ॐ विष्णुपाद अष्टोत्तरशतश्री श्रीमद्भक्तिप्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराजके
अनुगृहीत

श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
द्वारा अनुवादित एवं सम्पादित


श्रीगौड़ीय-वैष्णवाचार्य मुकुटमणि महामहोपाध्याय परमाराध्यतम परमपूज्यपाद श्रीलविश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर महोदय इस ग्रन्थके रचयिता हैं। इस ग्रन्थमें श्रीचैतन्यमहाप्रभुके मनोऽभीष्ट संस्थापक परमप्रिय पार्षद श्रीश्रीलरूप गोस्वामीके रचित अखिलरसामृतमूर्ति व्रजराज श्रीनन्दनन्दनके उज्ज्वल रसके परम विज्ञानमय श्रीउज्ज्वलनीलमणि ग्रन्थका सार-निर्यास अत्यन्त सरल-सहज और बोधगम्य संस्कृत भाषामें गागरमें सागरकी भाँति सन्निहित है।

इस ग्रन्थमें उज्ज्वल रसके विषयालम्बन नायक-चूड़ामणि श्रीकृष्ण, आश्रयालम्बन नायिकाओं, उनका स्वभाव, दूतियोंका परिचय, पञ्चविध सखियाँ, वयकाल, उद्दीपनविभाव, अनुभावसमूह, सात्त्विकभावसमूह, भावोत्पत्ति, स्थायीभाव-मधुरारति उनका आश्रय, शृंगार रसके अन्तर्गत संयोग व विप्रलम्भ आदिका संक्षिप्त वर्णन किया गया है।

Srila Rupa Gosvami, the very dear eternal associate of Sri Caitanya Mahaprabhu, established Srī Caitanya Mahaprabhu’s innermost desires in this world. He has compiled a scripture named Ujjvala-nilamaṇi, which is replete with realization of the ultimate, most effulgent mellow of amorous love for Sri Krsna, the king of Vraja and the emporium of all rasa. Srila Visvanatha Cakravarti Ṭhakura has taken the very essence of what was compiled by Srila Rupa Gosvami in Ujjvala-nilamani and presented it in very simple and easily understandable Sanskrit language, just like putting the entire ocean in a pot.

TITLE: उज्ज्वलनीलमणि-किरण  (Ujjavala Nilamani Kiran - Hindi)
AUTHOR: Srila Vishvanatha Chakravarti Thakura
TRANSLATED, EDITED and COMMENTARY by Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
PUBLISHER: Gaudiya Vedanta Publications
EDITION: Second, 2006
BINDING: SoftCover
PAGES and SIZE: 44,  6.5" X 4.75" 
SHIPPING WEIGHT: 250 grams, Illustrated
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Srila Visvanatha Cakravarti Thakura's essence of Srīla Rupa Gosvami's Ujjvala-Nilamani

श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
  • Author: Srila Vishvanatha Chakravarti Thakura
  • Hindi Translated and Commentary by Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: 2006, Gaudiya Vedanta Prakashan
  • Binding: SoftBound
  • Pages: 44
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