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श्री श्री भजनरहस्य (Sri Sri Bhajana Rahasya - Hindi)

सच्चिदानन्द भक्तिविनोद ठाकुर

  • Author: Srila Bhaktivinoda Thakura
  • Editor: Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: Gaudiya Vedanta Prakashan, 2001
  • Binding: Paperback
  • Pages: 276
  • FREE SHIPPING WITHIN INDIA

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श्रीश्रीगुरु-गौराङ्गौ जयतः

श्रीश्रीभजनरहस्यम्

अष्टकालीयलीलोपेतं संक्षेपार्चन-पद्धति-सहितञ्च
श्रीकृष्णचैतन्याम्नायाष्टमाधस्तनपुरुषवर्य श्रीरूपानुगवर
ॐ विष्णुपाद श्रीश्रीमत्
सच्चिदानन्द भक्तिविनोद ठाकुर
द्वारा संकलित

श्रीगौड़ीय वेदान्त समिति एवं तदन्तर्गत विश्वव्यापी
श्रीगौड़ीय मठोंके प्रतिष्ठाता, श्रीकृष्णचैतन्याम्नाय
दशमाधस्तनवर श्रीगौड़ीयाचार्यकेशरी
ॐ विष्णुपाद १०८ श्री
श्रीमद्भक्तिप्रज्ञान केशव गोस्वामीपादके

अनुगृहीत

त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण महाराज
द्वारा सम्पादित

कनिष्ठाधारगत निष्ठासम्पन्न साधकोंके लिए अर्चनकी व्यवस्था है। अर्चन और भजन, इन दोनों शब्दोंमें जो वैशिष्ट्य विराजमान है, उसे बहुत-से लोग समझ न सकनेके कारण 'अर्चन' -शब्दसे 'भजन' का ही निर्द्देश करते हैं। नवधाभक्तिके द्वारा भजन सम्भव है और अर्चन उसके अन्तर्गत होनेके कारण इसे भी भजनाङ्ग मान लिया गया है। समग्र भजन और भजनाङ्ग एक तात्पर्यपर नहीं है। संभ्रमज्ञान (ऐश्वर्य-ज्ञान युक्त मर्यादाबुद्धि ) के साथ अर्च्चा-विग्रहकी उपासनाको अर्चन कहते हैं। नाना प्रकारके उपचारोंके द्वारा प्रपंचागत विचारसे (स्थूलशरीरमें आत्मबुद्धिसे) मर्यादामूलक भगवत्सेवाको अर्चन कहते हैं। विश्रम्भसेवामें गौरवज्ञानकी प्रखर रश्मि क्षीणप्रभ प्रतीत होनेपर भी स्निग्ध कमनीय-चन्द्रिका-पूर्ण प्रकाशके माधुर्य-उत्कर्षको कोई भी अस्वीकार नहीं कर सकता। इस ग्रन्थके परिशिष्ट अंशमें संक्षिप्त अर्चन-पद्धति संयुक्त है। ग्रन्थके कलेवरमें भजनके गूढ़ार्थ तात्पर्यकी हृदयग्राही अभिव्यक्ति अंकित है। अर्चनमें स्थूल और सूक्ष्म शरीरगत सम्बन्ध न्यूनाधिक विजड़ित रहते हैं; किन्तु भजनराज्यमें स्थूल-सूक्ष्मके अतीत शरीरी भगवान् के प्रति साक्षात् रूपमें सेवारत होता है। सर्वप्रकारकी मायिक उपाधियोंसे विनिर्मुक्त भजनशील महापुरुषोंकी इन्द्रियोंमें प्रतीत होनेवाले भाव प्रापञ्चिक या मायिक नहीं होते; वे भावनापथके अतीत अद्वयज्ञान परतत्त्वके साक्षात् सान्निध्यहेतु कालातीत अतीन्द्रिय-सेवाके भाव हैं।

- श्रीहरिजनकिङ्कर दास

श्रीसिद्धान्त सरस्वती

शुद्धभक्ति-भागीरथीके वर्तमान प्रवाहके भगीरथ विष्णुपाद श्रीश्रीमद् सच्चिदानन्द भक्तिविनोद ठाकुर महाशयने स्वरचित 'श्रीहरिनाम-चिन्तामणि' ग्रन्थमें श्रीनाम-माहात्म्य, नाम, नामाभास, नामापराध-मूलक विचार और श्रीनाम-ग्रहणकी प्रणाली आदि विषयोंका विस्तृत रूपसे विवेचन प्रस्तुत कर ग्रन्थके परिशिष्टरूपमें 'भजनरहस्य' ग्रन्थका संकलन किया है। महामन्त्रमें आठ युगल नाम हैं; इन अष्ट युगलोंकी करुणाका वर्णन कर महामंत्र-कीर्तनके सहयोगसे अष्टकालीय-लीलाका अनुशीलन-चिन्तन कैसे करना चाहिए-इस लघु पुस्तिकामें ठाकुर महाशयने अत्यन्त अद्भुत और सुन्दररूपमें इसका दिग्दर्शन कराया है।

Sri Bhajana-rahasya is compiled by Srila Bhaktivinoda Thakura. He has collected into the form of a book several confidential hints from his own method of bhajana to guide sincere sadhakas who are performing bhajana under his direction. ... He [Srila Bhaktivinoda Thakura] was constantly reciting and relishing verses such as the ones in this book, thus becoming overwhelmed with bhagavat-prema. For sadhakas whose faith is on the neophyte platform, the system of arcana is provided. Many people are unable to understand the distinction between arcana and bhajana and therefore use the word bhajana to refer to arcana. One can practise bhajana by performing the nine kinds of devotion, navadha-bhakti. Because arcana is included within navadha-bhakti, it is also considered a part of bhajana. There is a difference between complete bhajana and partial bhajanaArcana means to worship the deity with awe and reverence; that is, with knowledge of the Bhagavan's opulence and by observing etiquette. It is also arcana to serve the Supreme Lord with various paraphernalia according to rules and regulations and with the mundane conception of identifying oneself with the material body. A brief arcana-paddhati has been added as an appendix to this book.

TITLE: Sri Sri Bhajana Rahasya - Hindi 
AUTHOR: Om Visnupada Sri Srila Bhaktivinoda Thakur
EDITOR: Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
PUBLISHER: Gaudiya Vedanta Prakashan
EDITION: First, 2001
PAGES and SIZE: 276, 7" X 5", with Sloka Index and Arcana Paddhati
SHIPPING WEIGHT: 450 grams
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श्री श्री भजनरहस्य (Sri Sri Bhajana Rahasya - Hindi)

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सच्चिदानन्द भक्तिविनोद ठाकुर

  • Author: Srila Bhaktivinoda Thakura
  • Editor: Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: Gaudiya Vedanta Prakashan, 2001
  • Binding: Paperback
  • Pages: 276
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