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श्रीजगन्नाथ रथ-यात्रा (Sri Jagannatha Ratha-yatra - Hindi)

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श्रीजगन्नाथ रथ-यात्रा  (Shri Jagannatha Ratha-yatra - Hindi)

( श्रीमन् महाप्रभुके द्वारा प्रदर्शित गूढ़ रहस्यपूर्ण भाव समन्वित वृत्तान्त )
A compilation of lectures by the Author on Ratha-yatra, the Cart Festival of Lord Jagannatha, the worlds ancient annual religious festival.

श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज

  • Author: Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja
  • Publisher: 2009, Gaudiya Vedanta Publications
  • Pages: 198, Softcover, Illustrated.
  • FREE SHIPPING WITHIN INDIA

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श्रीजगन्नाथ रथ-यात्रा
( श्रीमन् महाप्रभुके द्वारा प्रदर्शित गूढ़ रहस्यपूर्ण भाव समन्वित वृत्तान्त )

श्रीगौड़ीय वेदान्त समिति एवं तदन्तर्गत भारतव्यापी श्रीगौड़ीय
मठोंक प्रतिष्ठाता, श्रीकृष्णचैतन्याम्नाय दशमाधस्तनवर
श्रीगौड़ीयाचार्य केशरी नित्यलीलाप्रविष्ट
ॐ विष्णुपाद अष्टोत्तरशतश्री
श्रीमद्भक्तिप्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराजके
अनुगृहीत

त्रिदण्डिस्वामी
श्रीश्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराजके
द्वारा प्रदत्त वक्तृताओंपर आधारित
एवं तत्कृत सम्पादित

यद्यपि रथ-यात्राका उत्सव प्राचीन कालसे मनाया जाता है और अनेकानेक सम्प्रदाय, यहाँ तक कि मायावादी लोग भी इस उत्सवमें सम्मिलित होते हो, तथापि जिस रूपमें श्रीचैतन्य महाप्रभुने इस रथ-यात्राक अद्भुत और गूढ़ रहस्योंको प्रकाशित किया है, श्रीगौड़ीय-भक्तोंके अतिरिक्त प्रायः अन्यान्य सभी लोग उन रहस्योंसे अनभिज्ञ हैं।
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामीने श्रीचैतन्य महाप्रभुके नित्य परिकर तथा उनकी लीलाओंके प्रत्यक्षदर्शि श्रील स्वरूप दामोदर गोस्वामीके कड़चे तथा श्रील रघुनाथदास गोस्वामीके मुखकमलसे निःसृत कथाओंके आधारपर स्वरचित श्रीचैतन्य-चरितामृतमें रथ-यात्राक सम्बन्धमें श्रीचैतन्य महाप्रभुके द्वारा प्रकाशित सभी भावों और रहस्योंको जगत्-वासियोंके परम कल्याणक लिए अत्यन्त मार्मिक रूपमें लिपिद्ध किया है।

विषय-सूची :- प्रस्तावना, मङ्गलाचरण तथा रथ-यात्राका संक्षिप्त परिचय, भगवान् श्रीजगन्नाथदेवके प्राकट्य और रथ-यात्रासे सम्बन्धित प्रथम इतिहास, अपूर्ण रूपमें श्रीविग्रहोंके प्रकट होनेका प्रथम रहस्य,
अपूर्ण विग्रहोंका द्वितीय रहस्य, भगवान् श्रीजगन्नाथके भक्त-वात्सल्यको प्रदर्शित करनेवाला महाराज पुरुषोत्तम जानाका इतिहास और श्रीमन् महाप्रभु द्वारा राजा इन्द्रद्युम्नकी उपेक्षा, गुण्डिचा मन्दिर मार्जन,
रथ-यात्राका प्रसङ्ग, रथ-यात्रामें श्रीमन् महाप्रभुका भाव, श्रीमन् महाप्रभुक द्वारा करुक्षेत्रमें हुए गोपियों तथा श्रीकृष्णके बीच हुए वार्त्तालापका आस्वादन, हेरा-पञ्चमी, श्रीमन् महाप्रभुकी शिक्षाएँ, श्रीमन् महाप्रभुका कृष्ण-विरहमें प्रलाप।

Śrī Jagannātha Ratha-yātrā is bound to take one’s appreciation of Ratha-yātrā to new heights, beyond the thrill of an extraordinary cultural or religious experience. Annually, in Purī, India, approximately a million people attend the ancient Ratha-yātrā festival, to take darśana of Lord Jagannātha on His chariot, and at least three times that view it from other places in India and around the world. Still, the deep significance of Ratha-yātrā, being most confidential, is not widely known. Śrī Jagannātha Ratha-yātrā is rich with this significance, offering Gauḍīya Vaiṣṇavas an invaluable perspective of this wonderful event. The book contains three separate ancient histories of Ratha-yātrā as well as an elaborate description of Śrī Caitanya Mahāprabhu’s inner moods during the festival.

The basis of this book is The Origin of Ratha-yātrā, a transcription of Śrīla Bhaktivedānta Nārāyaṇa Gosvāmī Mahārāja’s English lectures, but because a written review and translation (into Hindi) of one’s spoken word will naturally contain intensified focus and greater detail, as well as elaboration and omissions, Śrī Jagannātha Ratha-yātrā is a new presentation of this subject. Due to Śrīla Mahārāja’s deep immersion in the beautiful moods of Śrī Caitanya Mahāprabhu, it is not surprising that his revelation of Śrī Ratha-yātrā is also suffused with this sublime sweetness and deep philosophical truths.

TITLE: Shri Jagannatha Ratha-yatra - Hindi

Author: Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja

PUBLISHER: Gaudiya Vedanta Publications.

EDITION: First Edition, 519 Gaurabda, 2009.

BINDING: Softcover

Pages and Size : 198 with 8 Color Plates, 8.25" X 5.5"

SHIPPING WEIGHT: 430 grams.

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